मुखड़ा चलो रे कांवड़िया, चलो हरिद्वार, भोले बाबा का खुला है द्वार। हर-हर महादेव गूँजे राहों में, भर लो भक्ति अपार॥ अंतरा 1 सावन की रिमझिम फुहारें आईं, भोले की यादें संग में लाई। गंगा जल की पावन धारा, मन को निर्मल कर जाए। हर कदम पर नाम शिव का, दिल में उजियारा छा जाए॥ मुखड़ा चलो रे कांवड़िया, चलो हरिद्वार, भोले बाबा का खुला है द्वार... अंतरा 2 कंधों पर कांवड़, होठों पर जयकारा, भोले का भक्त नहीं हारा। भक्ति की डगर कठिन सही, महादेव देते हर बार सहारा। गंगा तट पर दीप जलाएँ, भोले का गुणगान सुनाएँ॥ अंतरा 3 बेलपत्र, धतूरा, भांग चढ़ाएँ, श्रद्धा से शीश झुकाएँ। जो भी सच्चे मन से आए, भोले उसकी झोली भर जाएँ। डमरू की धुन जब गूँज उठे, भक्तों का मन झूम उठे॥ ब्रिज हर-हर महादेव की गूँज, गंगा मैया का पावन नूर। सावन का ये पावन मेला, भोले का प्रेम है भरपूर॥ अंतिम मुखड़ा चलो रे कांवड़िया, चलो हरिद्वार, भोले बाबा का खुला है द्वार। सावन में जो दर्शन पाए, उस पर बरसे भोले का प्यार। हर-हर महादेव, बम-बम भोले, गूँजे सारा संसार॥ हर-हर महादेव!